ग्राम पंचायत पर निबंध – Gram Panchayat Essay in Hindi

Essay on Gram Panchayat in Hindi

 

भारत गांवों का देश है। यहां की अधिकांश जनता गांव में बसती है। प्राचीन भारत में कई छोटे-छोटे प्रजातांत्रिक जनपद थे। उन में पंचायती-राज की व्यवस्था थी।

 

उन छोटे राज्यों में सबके लिए समान अधिकार, सब को स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त था। सबके लिए समुचित न्याय, समुचित व्यवस्था सुलभ थे। गांव के पारस्परिक विवादों का निपटारा गांव के सार्वजनिक सभा में कर दिया जाता था।

 

प्रजातंत्र का अर्थ ही है सत्ता की बागडोर जनता के हाथों में हो। लोकतंत्र या प्रजातंत्र का उद्देश्य है कि जनकल्याण के लिए नियम-कानून, जनता के विकास के लिए व्यवस्था और शासन जनता स्वयं लागू करें।

 

अंग्रेजी शासन स्थापित होने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में न्यायालय खुले हो। आप गरीब जनता के लिए न्याय महंगा हो गया। देश की स्वतंत्रता के पश्चात हमारे जननायकों का ध्यान अपनी प्राचीन परंपरा प्राचीन परम्परा, प्राचीन ग्रामीण व्यवस्था की ओर गया।

 

बिहार सरकार ने 1948 में पंचायती राज कानून पार्क पारित किया। इसके बाद यहां ग्राम पंचायत की स्थापना की गई। 1959 में इस कानून में संशोधन कर उत्तर बिहार में 5000 और झारखंड में 2500 जनसंख्या वाले गांवों में ग्राम पंचायत की व्यवस्था की गई।

 

ग्राम पंचायत का प्रमुख अंग कार्यकारिणी समिति है, जिसका प्रधान मुखिया होता है। मुखिया का चुनाव प्रजातांत्रिक प्रणाली के आधार पर वयस्क मताधिकार के द्वारा होता है।

 

कार्यकारिणी समिति में कम से कम 7 और अधिक से अधिक 15 सदस्य होते हैं। गांव की शांति और सुव्यवस्था का दायित्व मुखिया पर होता है। ग्राम पंचायत का दूसरा प्रमुख ग्राम कचहरी है।

 

यह गांव के न्यायिक कार्यों को संपादित करती है। ग्राम कचहरी का प्रधान सरपंच होता है। उसकी सहायता के लिए पंच होते हैं। सरपंचों और पंचो का चुनाव गांव के बालिग़ व्यक्तियों के द्वारा किया जाता है।

 

प्रत्येक ग्राम पंचायत में राज्य सरकार द्वारा एक ग्राम सेवक की नियुक्ति की जाती है। ग्राम पंचायत का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है। ग्राम कचहरी को तृतीय श्रेणी के दंडाधिकारी का अधिकार होता है।

 

1989 ईस्वी में सरकार ने पंचायती राज विधेयक पारित कर ग्राम पंचायत को संपूर्ण क्षेत्र की उन्नति का कार्यभार सौंप दिया है। इस विधेयक का उद्देश्य सत्ता का विकेंद्रीकरण कर आदर्श ग्राम का निर्माण तथा ग्रामीण आर्थिक स्थिति को सुधारने का प्रयास करना है।

 

अब ग्राम पंचायत में महिलाओं को 50% का आरक्षण दिया गया है। इस दिशा में प्रयास करने वाला बिहार देश का पहला राज्य है। अब झारखंड में भी हो गया है।

 

ग्राम पंचायत के अनिवार्य कार्य है – ग्राम सुधार की योजनाएं बनाना, गांव में प्रारंभिक शिक्षा, शिक्षा एवं स्वास्थ्य तथा संक्रामक रोगों से सुरक्षा की व्यवस्था करना, सिंचाई की व्यवस्था करना, आग से बचाव, गांव की सफाई, सरकारी सहायता से सड़क का निर्माण, कुए तथा पोखरे खुदवाना, हाट की व्यवस्था करना आदि।

 

Final Thoughts – 

 

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