पर्यावरण पर निबंध – Environment Essay in Hindi

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मुझे विस्वास है की आपको सभी निबंध की तरह यह भी Paryavaran Par Nibandh जरूर पसंद आएगा। अब हम आज का यह आर्टिकल शुरू करते हैं।

पर्यावरण पर निबंध इन हिंदी – Environment Essay in Hindi

“पर्यावरण” शब्द ‘परि’ और ‘आवरण’ शब्दों के संयोग से बना है। ‘परि’ का अर्थ है ‘चारों ओर’ और ‘आवरण’ का अर्थ होता है – आच्छादन या घिरा होना।

अतः पर्यावरण का अर्थ हुआ हमारे चारों ओर का वातावरण। अपने आसपास की हवा, जल या स्थल तथा अन्य सभी वस्तुओं को “पर्यावरण” कहते हैं।

इसमें भौतिक, रसायनिक तथा जैविक विशेषताओं में वांछनीय परिवर्तन ही प्रदूषण है। प्रदूषण से जीव-जंतु, पौधों एवं औद्योगिक संस्थानों को बहुत हानि होती है।

दूषित हो रही हवा, पानी, मिट्टी, मरूभूमि, दलदल, नदियों का उफनाकर बहना और गर्मी में सूख जाना, जंगलों को काटने से लेकर पेयजल का संकट, गंदे पानी का उचित रूप से विकास नहीं होना आदि पर्यावरण प्रदूषण के अंतर्गत आते हैं।

इस औद्योगिकरण में के युग में बड़े-बड़े नगरों में नालियों से गंदा-पानी, मल-मूत्र, कारखानों से राख़ या रासायनिक गैसें आदि निकलती रहती है, जिनसे हवा, जल या पृथ्वी के जीवन प्रदूषित पर्यावरण से प्रभावित होते हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय विज्ञान आदमी के वैज्ञानिकों के अनुसार यदि विश्व के सभी देश अपने कोयला-भंडार का दोहन करेंगे, तो जलवायु में अद्भुत परिवर्तन होगा और वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बहुत वृद्धि होगी।

जिसका खाद्य-उत्पादन और प्राणी-सृष्टि पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। भौतिक पर्यावरण ही भौगोलिक स्थिति में परिवर्तन लाता है। पर्यावरण-प्रदूषण की समस्या आज संसार के सामने एक विकराल रूप लेकर उपस्थित है।

इसे रोका नहीं गया तो वर्तमान सृष्टि का विनाश भी हो सकता है। पर्यावरण-प्रदूषण से बचने हेतु पेड़-पौधे, झड़िया आदि लगाई जानी चाहिए।

अब तो विकसित देशों में कारखानों के धुए को चिमनियों द्वारा कार्बन के रूप में बाहर कर लिया जाता है।

बेकार रासायनिक पदार्थों को नदियों में बहाकर नष्ट कर दिया जाता है और वाहनों से निकलने वाली गैसों पर नियंत्रण किया जाता है। आज प्रदूषण मानव के लिए चुनौती है।

अतः प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि पर्यावरण प्रदूषण से बचाव के कार्य में सहयोग कर सृस्टि को विनाश से बचाए। पर्यावरण-प्रदूषण से जीव जंतु और मानव प्रभावित होते हैं।

जनसंख्या की वृद्धि से सामाजिक पर्यावरण बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। पर्यावरण का प्रभाव पेड़-पौधे पर भी पड़ता है।

तरह-तरह की बीमारियों से समाज ग्रसित हो जाता है, इससे काफी नुकसान उठाना पड़ता है।

शिक्षा और स्वास्थ्य को पर्यावरण प्रभावित करता है। मानसिकता में बदलाव भी पर्यावरण पर निर्भर करता है। अतः पर्यावरण का स्वच्छ और स्वस्थ होना अति आवश्यक है।

भावी पीढ़ी में पर्यावरण से प्रभावित होता है। अतः पर्यावरण के प्रति जागरूक होने के लिए हर वर्ष “5 जून” को “पर्यावरण दिवस” के रूप में मनाया जाता है।

Final Thoughts – 

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