महात्मा गाँधी जी पर निबंध हिंदी में | Mahatma Gandhi Essay in Hindi

दोस्तों, आज के इस Hindi Essay के आर्टिकल में आप महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) जी पर हिंदी में निबंध पढ़ेंगे। इस हिंदी निबंध के आर्टिकल से पहले वाले डॉ राजेंद्र प्रसाद पर निबंध पढ़ा था।

 

इस आर्टिकल में हम गाँधी जी के पुरे जीवन के बारे में पूरी जानकारी लेंगे। जैसे की उनका जन्म कहा हुआ था, पढाई कहा पूरी हुयी थी और किस प्रकार उन्होंने अपने अधक प्रयास के बाद हमारे देश भारत को आज़ादी दिलवायें।

 

महात्मा गाँधी जी पर निबंध हिंदी में – Essay on Mahatma Gandhi in Hindi

Mahatma Gandhi in Hindi

महात्मा गाँधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था। इनका जन्म 2 अक्टूबर, 1869 ई. में गुजरात राज्य के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था। इनके पिता करमचंद गाँधी एक रियासत के दीवान थे और माता पुतली बाई एक महान धार्मिक महिला थी।

 

इनकी शिक्षा का श्री गणेश पोरबन्दर की पाठशाला से हुआ। बचपन में ही इनका विवाह कस्तूरबा नाम की बालिका से संपन्न करा दिया गया। मेट्रिक पास करने के बाद ये बैरिस्टरी पढ़ने के लिए लन्दन जाना चाहते थे लेकिन इनकी धर्मपरायण माता इस कार्य में बाधक थी।

 

गाँधी जी ने अपनी माता के सामने तीन कठोर प्रतिज्ञा किये। इसके पस्चात उन्हें उनकी माता ने उन्हें बैरिस्टर जाकर पढ़ने के लिए आज्ञा दिए। लन्दन से बैरिस्टर बनकर आने के बाद वे बम्बई हाई कोर्ट में वकालत करने लगे लेकिन सफ़लता नहीं मिल सकी।

 

वे एक मुकदमे की पैरवी में दक्षिण अफ़्रीका गए। जो इनके क्रांतिकारी जीवन का श्रीगणेश था। वहाँ इन्होने परिवासी भारतीयों के पक्ष में अग्रेजों का डटकर विरोध किया। दक्षिण अफ्रीका से सफ़लता एव अनुभव प्राप्त करके भारत आये।

 

भारत में क्रांति का श्री गणेश बिहार राज्य के चम्परान जिले में किया। धीरे-धीरे उनकी आवाज भारत भर में गुजने लगी। फिर तो आज़ादी की लड़ाई का बिगुल बज उठा। ‘असहयोग आंदोलन’, ‘भारत छोड़ो’, आंदोलन एवं ‘करो या मरो’ के नारे ने अंग्रेजों के विशाल साम्राज्य की नींव हिला दी।

 

इस क्रम में गाँधी जी को कई बार जेल की यात्राये भी करनी पड़ी एवं असहनीय पीड़ाये भी झेलनी पड़ी लेकिन सत्य और अहिंसा का वह पुजारी सदा अपने पथ पर चट्टान की तरह अडिग रहा।

 

15 अगस्त, 1947 को भारत आजाद हो गया। एक हजार वर्षो के बाद भारतीय जनता ने आज़ादी की हवा में सांस ली। 30 जनवरी, 1948 ई. संध्या की बेला थी। काल चुपके-चुपके आ पहुँचा और प्रार्थना की पवित्र बेला में नाथूराम गोडसे की तीन गोलियाँ चली। गाँधी जी गिरे और हे राम कहते हुए स्वर्ग सिधार गए।

 

इस खबर से भारत ही नहीं समूचा विश्व शोकाकुल हो उठा। गाँधी जी का राम राज्य का सपना अधूरा रह गया। आज हमारे बीच महात्मा गाँधी जी नहीं रहे लेकिन उनका सम्पूर्ण जीवन हमारे लिए प्रेरणाश्रोत हैं।

 

Final Thoughts – 

 

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