बाढ़ पर निबंध – Essay on Flood in Hindi

बाढ़ पर हिंदी में निबंध – Flood Essay in Hindi Language 

 

बाढ़ प्रकृति का प्रकोप या अभिशाप है। प्रकृति की पावन गोद में वास करने वाला राष्ट्र भारत दैवी विपत्तियों का भी शिकार बनता है। हैजा,प्लेग, चेचक आदि आकस्मिक महामारियों की तरह बाढ़ भी एक वैसे ही लोमहर्षक विपत्ति है।

 

पौराणिक कथाओं के आधार पर हम कह सकते हैं कि यह परमात्मा द्वारा भेजा गया अभिशाप है। जब धरती पर पापाचार बढ़ जाता है तो भगवान दैविक विपत्तियों को भेजते हैं।

 

एक ओर तो उनके विनाश के लिए और दूसरी और विलास एवं पापपूर्ण तन्द्रा में अलसाए हुए व्यक्तियों को सचेत करने के लिए। एक विशेष परिस्थिति में बाढ़ को प्रकृति का प्रकोप कह सकते हैं।

 

बाढ़ पर निबंध

 

प्रकृति तूफान और बाढ़ के द्वारा हमारी शुष्क, निराश, तार्किक मन को सही राह पर लाने का प्रयास करती है। वर्षा होती है, बर्फ पिघलती है, नदियों में पानी बढ़ जाता है।

 

पानी किनारा तोड़कर यत्र-तत्र फैल जाता है। जमीन डूबने लगती है, खेती बहने लगती है, घर दरवाजे बहने लगते हैं। यही बाढ़ है। बाढ़ आने पर चारों ओर बहता हुआ पानी कोलाहल करता है।

 

नदिया घहराती है, किनारे टूटते हैं। अनवरत वर्षा से प्रलय-काल जैसा दृश्य उपस्थित हो जाता है। व्यक्ति तथा समाज का जीवन कंटकाकीर्ण हो जाता है।

 

भारत में बाढ़ की चपेट से मुख्यतः एक ही राज्य हमेशा विशेष रूप से प्रभावित होता आया है और हो रहा है, वह है – बिहार। बिहार के लिए बाढ़-समस्या सर्वाधिक प्रबल एवं दुस्सह समस्या है।

 

बाढ़ के आधिक्य से ही यह “बाढ़भूमि” कहलाने लगा है। यो तो वर्षा के जलप्लावन से प्रायः सर्वत्र ही बाढ़ का विध्वंसकारी दृश्य उपस्थित हो जाता है, किंतु उत्तरी बिहार तो निराश्रित ही बन जाता है।

 

गंगा की बाढ़ भी इधर लगातार कई वर्षो से होड़ लगा बैठी है। मुजफ्फरपुर, चम्पारण, बेतिया, सीतामढ़ी, सिवान, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, खगरिया, भागलपुर इत्यादि जिलों के अधिकार क्षेत्र बाढ़ग्रस्त हो जाते हैं।

 

बाढ़ से लहलहाती फसलें नष्ट हो जाती है। अनगिनत धन-जन और पशु की क्षति होती है। आवागमन के मार्ग प्रायः बंद हो जाते हैं। बाढ़ के आकस्मिक आगमन से बचाव कठिन हो जाता है।

 

अकाल का भयंकर रूप आरंभ हो जाता है। सरकार की सारी विकास योजनाएं ठप पड़ जाती है। जब बाढ़ आ ही जाए तो उसके दुख को कम करने और दूर करने के लिए हमें प्रयत्नशील होना चाहिए।

 

गिरे घरों को उठाना पड़ेगा और उजरो गावों को फिर से बसाना होगा। हमें मानवता के नाम पर बाढ़ की विभीषिका को रोकने के लिए हर प्रयत्न करना चाहिए और बाढ़-पीड़ितों की रक्षा के लिए कमर कसकर आगे आना चाहिए।

 

Final Thoughts – 

 

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