पुस्तकालय पर निबंध हिंदी में – Essay on Library in Hindi

‘पुस्तकालय’ शब्द दो शब्दों के मिलने से बना है – ‘पुस्तक’ और ‘आलय’। पुस्तक का अर्थ – किताब और आलय का अर्थ ‘घर’ अर्थात जहाँ उपयोगी पुस्तकों का संग्रह किया जाय, उसी को पुस्तकालय कहा जाता है। 


तो दोस्तों आज के HindiDeep.Com के इस Hindi Essay के आर्टिकल में आप पुस्तकालय अर्थात लाइब्रेरी (Library) पर हिंदी में निबंध पढ़ेंगे। 

आपने अभी तक कई प्रकार हिंदी निबंध हमारे ब्लॉग पर पढ़ा होगा जैसे की सत्संगति पर निबंध, सदाचार पर निबंधविद्यार्थी जीवन के महत्व पर निबंध आदि। 

अब हम आज का यह आर्टिकल पुस्तकालय पर हिंदी निबंध (Library in Hindi Essay) को शुरू करते हैं। आप यह निबंध पढ़ने के बाद निबंध कैसा कमेंट के माध्यम से जरूर बताए। 

पुस्तकालय पर निबंध – Pustakalaya Essay in Hindi Language

पुस्तकालय एक सांस्कृतिक केंद्र है जिससे ज्ञान की किरणें फुटकर जीवन को ज्योतिमर्य कर देती है, अँधेरे में जैसे दीपक उजाला फैलाता है ठीक उसी प्रकार समाज में पुस्तकालय शिक्षा को फैलाता हैं। 

पुस्तकालय अज्ञानता के अंधकार को मिटाने का महत्वपूर्ण साधन हैं। पुस्तकालय ज्ञान का केन्द्र है जहाँ विभिन्न प्रकार की पुस्तकों का संग्रह किया जाता है। 

पुस्तकालय ऐसी जगह है, जहाँ बैठकर सभी तरह के लोग अच्छी-अच्छी पुस्तकों का अध्ययन कर सकते हैं। 

पुस्तक मनुष्य के लिए सबसे निकट की सहयोगी है। हर आदमी हर एक उपयोगी पुस्तक को खरीद नहीं सकता है। ऐसे लोगो के लिए पुस्तकालय वरदान साबित होता है। 

पुस्तकालय में तरह-तरह की पुस्तकें सबको बारी-बारी से उपलब्ध कराई जाती है। इससे हमें दुर्लभ ज्ञान की प्राप्ति होती हैं। 

कुछ पुरातन पुस्तकें जो आज अलभ्य हो चुकी हैं, ऐसी पुस्तकों को प्राप्त करने का एकमात्र साधन पुस्तकालय ही हैं। 

पुस्तकालय के प्रकार (Pustakalaya Ke Parkar in Hindi) – 

मुख्य रूप से पुस्तकालय तीन प्रकार के होते हैं : 

1 . व्यक्तिगत पुस्तकालय, 
2 . सार्वजानिक पुस्तकालय और 
3 . राजकीय पुस्तकालय 

1 . व्यक्तिगत पुस्तकालय – व्यकितगत पुस्तकालय उसे कहा जाता है जिसमें पुस्तकों का संग्रह एक खास व्यक्ति करता है। कोई व्यक्ति लगातार पुस्तकों को जमा करके धीरे-धीरे पुस्तकालय का संगठन कर सकता है। 

2 . सार्वजनिक पुस्तकालय – सार्वजनिक पुस्तकालय साधारण लोगों के सहयोग से खोला जाता है और उस पर समाज का अधिकार रहता है। ग्राम, शहर, मुह्हले, विद्यालय आदि में इस प्रकार के पुस्तकालय हुआ करते हैं। सार्वजनिक पुस्तकालय सबके लाभ को ध्यान में रखकर खोला जाता है। 

3 . राजकीय पुस्तकालय – राज्य सरकार, लोगों की सुविधा के लिए अपने खर्च से, जिस पुस्तकालय का निर्माण करती है, उसे राजकीय पुस्तकालय कहा जाता हैं। इस प्रकार के पुस्तकालय बड़े-बड़े शहरों में पाए जाते हैं। 

स्वाध्याय के लिए पुस्तकालय बहुत आवश्यक है। जब तक हर एक गाँव में पुस्तकालय नहीं हो जाता तब तक देश में शिक्षा कर प्रचार-प्रसार वास्तविक रूप से सफल नहीं हो सकता हैं। 

Final Thoughts – 

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