Ecosystem Meaning in Hindi

Ecosystem Meaning in Hindi

Noun

  • पारिस्थितिक तंत्र
  • क्षेत्र-विशेष में पाए जाने वाले व अपने परिवेश से सम्बंधित सभी पौधे व पशु

Pronunciation (उच्चारण) –

  • Ecosystem – इकोसिस्टम

Ecosystem Meaning and Definition in Hindi with All Details –

प्रत्येक सजीव चाहे वह जन्तु हो या पेड़-पौधा एक खास स्थान में रहता है। यह खास स्थान वातावरण है जिसके साथ उसका अन्योन्याश्रय संबंध होता है।

साथ ही सजीवों का शरीर उस स्थान (वातावरण) के अनुसार अनुकूलित (Adapted) भी रहता है। उदाहरण – मछली जल में, चिंड़ियाँ पेड़ पर, सांप बिल में, हाथी जंगल में रहता है।

मछली को जल से बाहर निकाल देने पर भी मर जाती है। अर्थात् उसका शरीर जलीय वातावरण (Aquatic Environment) हेतु अनुकूलित रहता है, वह मिट्टी, हवा में नहीं रह पाता है।

यहां पर स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि जल में अन्य सजीव (मेढ़क, कीट, घोंघा, जलीदय पौधे आदि) तथा निर्जीव (मिट्टी, बालू, रासायनिक पदार्थ आदि) भी हैं।

इन दोनों (जैव-Biotic एवं अजैव-Abiotic) घटकों के साथ मछली का संबंध है। मछली का जीवन इन घटकों के साथ जुड़ा रहता है।

सभी घटक के बीच जलीय वातावरण में पदार्थों का आदान-प्रदान चलता रहता है। किसी.भी घटक के कोई भी तत्व की अनुपस्थिति या कमोवेश की हालत में मछली का जीवित रहना असंभव हो जाता है।

अतः कहा जाता है कि वातावरण के विभिन्न पहलूओं जिसके द्वारा सजीवों की उपलब्धता, वितरण, आचरण एवं जीवित रहने की क्षमता निर्धारित होती है – वातावरणीय कारक (Environmental factors) या पारिस्थितिक कारक (Ecological Factors) कहलाते हैं।

जीव समुदाय एवं वातावरण एक तंत्र के रूप में कार्य करते हैं, इसी को ‘इकोसिस्टम‘ कहते हैं। प्रकृति स्वयं एक विस्तृत एवं विशाल पारिस्थितिक तंत्र या इकोसिस्टम है जिसे जीवमण्डल के नाम से पुकारा जाता है।

संपूर्ण जीव समुदाय एवं पर्यावरण के इस अंर्तसंबंध को इकोसिस्टम का नाम सर्वप्रथम ए. जी. टेन्सले ने 1935 में दिया। सन् 1877 में कार्ल मोबिअस ने ‘Bicoenosis’ एस ए फोरबेस ने 1887 में (Microcosm), थियनेमान ने 1939 में बायोसिस्टम आदि नाम दिये।

इकोसिस्टम दो शब्दों से मिलकर बना है अर्थात् ‘एकघर’ और दूसरा ‘सिस्टम’ जिसका अर्थ है व्यवस्था या अंर्तसंबंध।

पारिस्थितिकी तंत्र के संदर्भ में यह बात महत्वपूर्ण है कि पारिस्थितिकी तंत्र की भौतिक संरचना अर्थात आकार, आकृति, सीमागत विविधता आदि महत्वपूर्ण नहीं है।

प्रत्युत उनमें ऊर्जा का प्रवाह और रासायनिक तत्वों के चक्रों के प्रक्रम का अस्तित्व ही महत्वपूर्ण होता है। अतः पारिस्थितिक तंत्र वास्तव में प्रकृति में विद्यमान एक ऐसी व्यवस्था है जो स्थान एवं काल-सापेक्ष है।

इसी स्थान एवं कालगत सापेक्षता के परिप्रेक्ष्य में जैविक एवं अजैविक संघटक अपनी पारस्परिक अंतःक्रियाओं के द्वारा अनेक विशिष्टताओं को प्रकट करते हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र का अस्तित्व ऊर्जा प्रवाह पर निर्भर होता है और यह प्रवाह निरंतर बना रहता है। पारिस्थितिक तंत्र के अंतर्गत ऊर्जा का उत्सर्जन एक सुनिश्चित अनुपात में हुआ करता है।

अनुपात की यही सुनिश्चितता प्रकृति में संतुलन का कारण है। इसे ही पारिस्थितिकी तंत्र की संतुलन अवस्था कहा जाता है।

किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र में उदाहरण स्वरुप तालाब में जीवों की विद्यमानता (Existence) एवं विनाश प्रकृति के नियमानुसार होता है।

लेकिन तालाब में जिस स्रोत से पानी आता है उसे अवरुद्ध कर देने पर पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन आ जायेगा। इसी कारण पारिस्थितिकी तंत्र को क्षेत्रीय इकाई में पर्यावरण और जैविक अंतर्संबंधों का संतुलन कहा जाता है।

जैव-मण्डल (Biosphere) में जैविक (Living) एवं अजैविक (Non-living) तत्वों के बीच के परस्पर संबंधों का कार्यात्मक संतुलन ही पारिस्थितिक तंत्र है।

पारिस्थितिकी का वर्गीकरण (Classification of Ecosystem)

संसार के विभिन्न भागों में विभिन्न प्रकार के इकोसिस्टम पाये जाते हैं। कुछ इकोसिस्टम को तथा कुछ बड़े होते हैं। हमारी पृथ्वी स्वयं में एक बहुत बड़ा इकोसिस्टम है।

जन्तु एवं वनस्पतियों के विभिन्न पारिस्थितिक वर्ग हमारी पृथ्वी की सतह के विभिन्न भागों में प्रवास करते हैं। इन प्राकृतिक पारिस्थिति वर्गों को बायोम्स कहते हैं।

पृथ्वी पर पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के इकोसिस्टम का आकार, प्रकृति एवं परिमाण, वर्षा, तापक्रम, भूमिकारक, पर्वत तथा समुद्र इत्यादि से निर्धारित होता है।

जलवायु, निवास तथा पादप समुदाय के आधार पर संसार के प्रमुख इकोसिस्टमों को दो मुख्य वर्गों में विभाजित किया गया है –

(1) जलीय इकोसिस्टम (Aquatic Ecosystem),

(2) स्थलीय इकोसिस्टम (Terrestrial Ecosystem)

दोनों प्रकार के इकोसिस्टम आवास तथा पाये जाने वाले जीवों के आधार पर फिर से विभाजित किये जा सकते हैं।

1 . जलीय इकोसिस्टम (Aquatic Ecosystem) – यह जल में पाया जाने वाला इकोसिस्टम है। यह दो प्रकार का होता है –

(a) स्वच्छ जलीय (Fresh Water Ecosystem) : इसमें मुख्यतया तालाबों, नदियों तथा झीलों का इकोसिस्टम आता है।

(b) समुद्रीय इकोसिस्टम (Marine Ecosystem) : यह समुद्र में पाया जाने वाला इकोसिस्टम है जो सबसे बड़ा एवं अपरिवर्तनीय इकोसिस्टम है।

2 . स्थलीय इकोसिस्टम (Terrestrial Ecosystem) : स्थलीय इकोसिस्टमों में वे इकोसिस्टम आते हैं जहां जीवीय घटकों (Biotic Components) का आवास भूमि पर होता है। आवास परिस्थितियों के आधार पर ये अग्र प्रकार के होते हैं –

(a) मरुस्थलीय इकोसिस्टम (Desert Ecosystem)

(b) घासस्थलीय इकोसिस्टम (Grassland Ecosystem)

(c) वन का इकोसिस्टम (Forest Ecosystem)

3 . मनुष्य द्वारा निर्मित इकोसिस्टम (Man made Ecosystem) : उपलिखित जलीय एवं स्थलीय इकोसिस्टम प्राकृतिक इकोसिस्टम है जो प्राकृतिक रुप से पृथ्वी पर पाये जाते हैं इसके अतिरिक्त कुछ इकोसिस्टम मनुष्य द्वारा निर्मित होते हैं इन्हें मानव-निर्मित अथवा कृत्रिम इकोसिस्टम कहते हैं।

ये जलीय एवं स्थलीय दोनों ही प्रकार के हो सकते हैं। खेत प्रणाली, बाग-बगीचे इत्यादि मानव द्वारा निर्मित इकोसिस्टमों के उदाहरण है। ठीक प्रकार से निर्मित जल जीवशाला (Aquarium) भी एक कृत्रिम इकोसिस्टम का उदाहरण है।

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